आधुनिकता और बराबरी की ओर बढ़ते हम!!!!!!!!
जी हां, बड़ी तेजी से आधुनिक हो रहें हैं, हमनें हमारे ऊपर लगे "गंवारपन" के ठप्पे को अब उतार के फेंक दिया है और हर उस चीज को अपनाना शुरू कर दिया है जो हमें आधुनिकता की श्रेणी में लाकर खड़ा करता है। मैंने यहीं कहीं पढ़ा कि 'महिलाएं भी अब आधी रात को शराब की दुकानों में जाकर धड़ल्ले से शराब खरीदती ,और पीती है .. सिगरेट पीना और कई पुरूषों के साथ संबंध बना लेनें में भी अब उन्हें कोई हिचकिचाहट नहीं होती.... हो भी क्यों क्या हम पुरूषों से किसी मामले में कम हैं!!आज हर जगह ,हर फील्ड में हम पुरूषों के कंधे से कंधा मिलाकर चल रहें हैं तो यहां क्यूं नही??? मुझे याद है फिल्म "कबीर सिंह"देखनें के बाद फिल्म पर चिंता व्यक्त करते हुए मैनें कहा था कि "ये हम कैसा समाज दिखा रहें हैं जिसमें एक डाक्टर को शराब पीकर आपरेशन करते दिखाया गया है ???"फिर हमनें इसी प्रश्न का उत्तर देते हुए किसी का कंमेंट पढ़ा कि आदमी जब प्यार में होता है तो वो कुछ भी कर सकता है,और वो वाजिब भी है.... सही तो है इसी को तो सच्चा प्यार कहतें हैं!!! इस सच्चे प्यार की आड़ में लोग बड़े बड़े कुकृत्य भी कर जातें हैं,और उसे वाजिब भी ठहरा देतें हैं।वैसे भी आज की जेनरेशन को मैंनें कहते सुना है कि वो"कंट्रोल"में रहकर पीना जानती है ,ये अलग बात है कि कब उसका ये कंट्रोल एक पैग से दो -तीन बोतल में कब बदल जाता है उसे पता भी नहीं चलता....
और... अब तो हम इतने आधुनिक भी होतें जा रहें हैं कि हमनें सारी नयी तकनीक को अपनें एक कमरें में समेट लिया है,जिससे हमें मनोरंजन के लिए या लोगों से संपर्क करनें के लिए कहीं बाहर भी नहीं जाना पड़ता... घर पर बैठकर ही हम अपनी भावनाएं लोगों तक पहुंचा देते हैं, कोई भी जानकारी किसी भी विषय पर चुटकियों में मिल जाती हैं हमें,किसी की जरूरत ही नहीं...
ये सब घटनांए मेरे दिमाग को सोचनें पर मजबूर कर देती हैं कि क्या हम सचमुच सचमुच आधुनिक हो रहें हैं ??? महिलाओं में पुरूषों की बराबरी करनें की जो होड़ चल रही है वो क्या हमें सही रास्ते पर ले जा रही है???? मुझे तो लगता है कि आजकल की पीढ़ी नें अपनी भारतीय परंपराओं को अधिक से अधिक नकारने को ही आधुनिकता मान लिया है।वो समझ ही नहीं पा रहें हैं कि वो क्या खो रहें हैं और उसका अंजाम क्या होगा?.. ऐसा नहीं है कि मैं आज की पीढ़ी को हर एंगल से खराब कह रही हूं ,,,आज की पीढ़ी पहले के लोंगों से ज्यादा समझदार,निडर और confident है.... पर मुझे लगता है कि आजकल स्त्री/पुरूष आधुनिकता के नाम पर जो भारतीय परंपराओं की तिलांजलि दे रहें हैं वो सही नहीं....
मेरे मानना है कि शराब पीना,सिगरेट पीना ,एक से ज्यादा लोगों के साथ सेक्शुअल रिलेशनशिप रखना ,ना तो पुरूषों के लिए उचित है न महिलाओं के लिए.
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अक्सर महिलाओ के कपड़ों को लेकर बहस छिड़ी रहती है पर मेरा मानना है कि चाहे स्त्री हो या पुरूष हमें कपड़े इस बात को ध्यान में रखकर पहननें चाहिए कि हम किस जगह / माहौल में जा रहें हैं।
मैं भी चाहती हूं कि कानून व्यवस्था इतनी अच्छी हो कि कोई भी चाहे वो स्त्री हो या पुरूष बेखौफ आधी रात के वक्त घर से बाहर निकल सकें,पर शराब पीनें के लिए नहीं बल्कि कुछ जरूरी काम हो उसके लिए.…
महिलाएं पुरूषों की बराबर सही चीजों में करें,व्यसनों में नहीं,क्योंकि कोई भी व्यसन स्त्री और पुरूष दोनों के लिए व्यसन ही होता है,और सर्वनाश ही करता है।
मुझे लगता है स्त्री - पुरूष एक दूसरे का सम्मान करना सीख लें तो किसी भी तरह के होड़ की जरूरत ही नहीं होगी।
और हां आधुनिक बननें के चक्कर में अपने भारतीय परंपराओं को सड़ी गली कहकर उसका मजाक मत बनाइये बल्कि उसको गहराई से समझिये क्योंकि उसके मूल में बहुत सा प्यार और अपनापन छिपा है ।हां मैं मानती हूं कि कुछ स्वार्थी लोगों ने उस परंपरा को समय समय पर तोड़ मरोड़ कर पेश किया है।
जिंदगी में आगे बढ़िये लेकिन अपनों से होड़ लगा कर नहीं बल्कि अपनों को जोड़कर।
आधुनिकता अपने भारतीय मूल्यों को साथ लेकर आगे बढ़नें से आयेगी ना कि उन्हें भूलकर आगे बढ़ने से।
और हां फिल्मों को सिर्फ मनोरंजन तक ही रखिये उन्हे अपनी जिन्दगी में समावेश मत करिये,क्योंकि फिल्मों में डायेरेक्टर जब चाहे तब सुखद अंत करा देता है लेकिन रियल जिंदगी में ऐसा नहीं होता ,क्योंकि हो सकता है आप अपने बुरे कर्मों की वजह से सुखद अंत तक पहुंचे हीं ना या अगर सुधर कर पहुंच भी गये तो बहुत देर हो चुकी हो,,फिर ये गाना ही याद आयेगा...
"सबकुछ लूटा के होश में आये तो क्या किया?"
"मधु"
Bilkul sateek lekh. Keep it up.
ReplyDeleteThanks dear
ReplyDeletevery well written..keep it up SIS.
ReplyDelete❤️❤️❤️
ReplyDeleteआधुनिकता की होड़ मै महिलाओ को पुनः सोचने पर विवश करती ऒर पुरुष समाज को महिलाओ के लिए सुरक्षा ऒर सम्मान की तरफ प्रेरित करती पोस्ट के लिए बहुत बहुत बधाई 🙏🙏
ReplyDeleteशुक्रिया, संजू शर्मा जी🙏🙏
DeleteThank you for sharing your thoughts:) Very well written.It can be hard to understand for some people, but I think many people can relate to this in different ways.
ReplyDeleteThanks....मुझे मालूम है बहुत से लोग सहमत नहीं होंगे, आधुनिकता की परिभाषा जो बदल गयी है....
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